महामारी के कारण देश ही नहीं पूरी दुनिया प्रभावित थी। धीरे-धीरे इसका प्रकोप इतना बढ़ता गया कि दफ्तर, स्कूल-कॉलेज सभी पर ताले लग गए। स्कूल बंद होने से इसका सीधा असर बच्चो की पढ़ाई पर हुआ। लॉकडाउन में सभी बच्चे अपने घरों में सिर्फ मौज मस्ती करते रहते थे लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी थे जिन्होंने इस खाली समय का बहुत अच्छे से फायदा उठाया। आज उन बच्चों ने कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है जिससे उनके माता पिता को उन पर गर्व हो रहा है। यह है हरियाणा के दो जुड़वा भाइयों की कहानी। इन्होंने पीएम मोदी के नारे आत्मनिर्भर भारत को सार्थक करते हुए छोटी सी उम्र में एक अच्छी पहल की है।
यह कहानी है हरियाणा के जिला कैथल के गांव कुराड़ की, जहां दो जुड़वां भाइयों ने मिलकर घर के आंगन में बस, ट्रैक्टर, डीजे जीप, कंबाइन व केटीएम बाइक खड़ी कर दी।

आपको बता दें कि जिन गाड़ियों की हम बात कर रहे हैं वह असली तो नहीं हैं लेकिन उससे कम भी नहीं है। दसवीं में पढ़ने वाले तन-मन ने लकड़ी व गत्तों को जोड़कर गाड़ियों के ऐसे मॉडल तैयार किए हैं जो बिलकुल असली लग रहे हैं और असली गाड़ियों की तरह काम भी करते हैं।
पिता ने किया सपोर्ट
खेल-खेल में इन बच्चों ने सबसे पहले एक गत्ते की जीप डीजे सिस्टम बनाया और यह बिलकुल असली म्यूजिक सिस्टम की तरह ही काम करता था। जिसके बाद उन्होंने और दूसरी गाड़ियों के मॉडल बनाने के लिए पिता विक्रम से रुपये मांगे तो उनके पिता ने मॉडल देखा और कहा कि तुम लोग इसे तैयार तो कर रहे हो लेकिन उनके पास खर्चने के लिए ज्यादा रुपये नहीं हैं। तब बच्चों ने कहा कि ये सिर्फ लकड़ी और गत्ते से बनते है, इसमें ज्यादा खर्चा नहीं आता।

हुबहू असली लगती हैं गाड़ियां
इसके बाद पिता ने दोनो बच्चों तन और मन का साथ दिया और दोनों ने महामारी के दौरान बस, ट्रैक्टर, डीजे जीप, कंबाइन व केटीएम बाइक बना दी जो दिखने में हुबहू असली लग रही थी। गत्ते की यह गाड़ियां सिर्फ दिखने में नहीं बल्कि काम भी असली की तरह ही करती हैं।
लाइटों से जगमगा उठती हैं गाडियां

एक बटन दबाते ही मॉडल में लगी सभी लाइटें जगमगा उठीं। बात करें बस की तो जिस तरह एक असली बस की खिड़कियां, लगेज बॉक्स, सीटें, स्टेयरिंग व्हील, हैडलाइट, शीशे आदि होते हैं इस मॉडल में भी सभी चीजें हुबहू असली की तरह है। ट्रैक्टर भी वर्किंग मॉडल की तरह ही काम करता है। वहीं जीप पर डीजे सिस्टम फिट किया गया है जिसके बजने के बाद बच्चे झूम उठते हैं। इसी तरह केटीएम बाइक और कंबाइन भी बनाई गई है।
फिलहाल यह दोनो भाई बारहवीं कक्षा के छात्र हैं और जल्द ही वह एक मोटरसाइकिल के इंजन के साथ सड़क पर दौड़ने वाली जीप भी बनाएंगे। दोनों भविष्य में इंजीनियर बनना चाहते हैं। इन्होंने महामारी के दौरान यह सब बनाना शुरू किया था।
एक साथ पैदा हुए तन-मन और उनकी बहन

बच्चों के पिता विक्रम ने बताया कि दोनों ही बच्चों के गांवों व आसपास के एरिया में चर्चे है। वहीं मां विनीता ने बताया कि उनके एक साथ तीन बच्चे पैदा हुए जिसमें दो लड़के तन और मन व एक लड़की जिसका नाम धन है। तीनों ही 12 वीं कक्षा में पढ़ते हैं। बच्चो के पैदा होने पर आस-पड़ोस के लोगों ने कहा की तीन बच्चे एक साथ पैदा हों तो शुभ नहीं है। लेकिन विनीता ने सबकी बातों को अनसुना करते हुए, अपने तीनों बच्चों का लालन-पालन एक साथ किया जो आज इस तरह के मॉडल बनाकर माता-पिता का नाम रोशन कर रहे हैं।