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पिता से पहले बेटियों के गुरु बने महावीर फोगाट, संघर्ष और मेहनत ने बनाया ‘दंगल गर्ल्स’ को विश्व चैंपियन

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किसी भी बच्चे के पहले गुरु उसके माता-पिता होते हैं। बच्चे को बोलने से लेकर उसे चलना तक सिखाते है। पिता की उंगली थामे बच्चा बड़ा होता है। जितना एक पिता अपने बच्चे के लिए करता है वो कोई भी नहीं कर सकता। वह दिन रात अपने बच्चे की खुशी के लिए एक कर देता है। एक पिता (Guru Purnima) ही है जो अपने बच्चों का कद खुद से भी ऊंचा देखना चाहता है। जिन सपनों को वह खुद पूरे नहीं कर पाए, वह उन सपनों को अपने बच्चों की आंखों में (Dangal Girls) देखते हैं और जब बच्चा अपने पिता का सपना पूरा करता है तो पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहता। ऐसा ही एक कहानी है हरियाणा के जिला दादरी के गांव बलाली निवासी पहलवान महावीर फोगाट (Wrestler Mahaveer Phogat) की।

पहलवान महावीर फोगाट ने उस समय अपनी बेटियों को सपोर्ट किया, उनकी परवरिश की जब पूरा गांव उन्हें बेटियों को कुश्ती सिखाने के लिए भला-बुरा कहता था। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। एक गुरु के रूप में बेटियों को बारीकी से कुश्ती के गुर सिखाए। इसी का नतीजा है कि आज उनकी बेटियां पूरे विश्व में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय पहलवान गीता फोगाट (Geeta Phogat), बबीता फोगाट (Babita Phogat) आज जिस मुकाम पर उसके पीछे उनके पिता महावीर फोगाट का बहुत बड़ा योगदान है। आज यह दोनो पहलवान किसी दूसरे के पहचान की मोहताज नहीं हैं।

पिता के पर्दे के पीछे की मेहनत की बदौलत ही आज उनकी बेटियां इस मुकाम पर हैं। गीता, बबीता के अलावा उनकी बेटी रितू फोगाट व संगीता फोगाट (Sangeeta Phogat) ने भी कुश्ती में खूब नाम कमाया। हालांकि रितू फोगाट (Ritu Phogat) कुछ वर्ष पहले कुश्ती को अलविदा कह मिक्सड मार्शल आर्ट्स में नाम कमा रही है। वह अपने भाई की बेटी विनेश फोगाट (Vinesh phogat) के भी गुरु रहे हैं।

पिता ने हर कदम पर गुरु के तौर पर किया मार्गदर्शन : गीता

गांव बलाली निवासी अंतरराष्ट्रीय पहलवान व वर्तमान में हरियाणा पुलिस में डीएसपी गीता फोगाट बताती हैं कि उनके पिता महावीर फोगाट खुद पहलवान हैं। उनका सपना ओलिंपिक में मेडल लाकर पहलवानी में अपना नाम चमकाना था। लेकिन पारिवारिक कारणों के चलते उनके पिता को यह सपना बीच में ही छोड़ना पड़ा।

गीता ने बताया कि वर्ष 2000 में कर्णम मल्लेश्वरी ने ओलिंपिक में पदक जीता तो उनके पिता ने सोचा कि जब यह बेटी पदक जीत सकती है तो उनकी बेटियां क्यों नहीं। बस फिर क्या था, उन्होंने दोनों बहनों (गीता व बबीता) की आंखों में अपना सपना देखा और उन्हें एक गुरु, कोच के रूप में कुश्ती के गुर सिखाने शुरू कर दिए।

बेटियों को कुश्ती जैसे खेल में उतारने पर कई लोगों ने उनके पिता को खूब ताने भी दिए। लेकिन उन्होंने इस प्रकार की बातों के बजाय बेटियों को प्रशिक्षित करने पर ही ध्यान केंद्रित रखा। हर रोज कई-कई घंटों तक प्रेक्टिस करवाई।

गीता का कहना है कि उनके पिता ने हर कदम पर, हर मुश्किल घड़ी में पिता के साथ-साथ गुरु के तौर पर उनका मार्गदर्शन किया है। यह सिलसिला अभी भी जारी है। गीता फोगाट ने बताया कि उनके पिता, गुरु पहलवान महावीर फोगाट हमेशा उनके प्रेरणास्त्रोत रहेंगे।

सभी परिस्थितियों का सामना करने की दी सीख

हरियाणा महिला विकास निगम की चेयरपर्सन व अंतर्राष्ट्रीय पहलवान बबीता फोगाट ने पिता को धन्यवाद करते हुए कहा है कि उनके पिता महावीर फोगाट ने उन्हें गुरु के तौर पर हर वो सीख दी है, जिससे वे किसी भी प्रकार की स्थिति का खुद ही सामना कर सकें। उन्होंने बताया कि कुश्ती के मैदान में या फिर प्रेक्टिस के दौरान उनके पिता केवल कोच के तौर पर ही उनसे बात करते थे। इस दौरान यदि उनसे कोई गलती होती तो वे उन्हें धमकाने में भी गुरेज नहीं करते थे।

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