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हरियाणा में बाल मजदूरी करने वाले इस बच्चे की मेहनत रंग लाई, आज है यह तीन बड़ी कंपनियों का मालिक

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चाहो तो जिंदगी में सब कुछ हासिल किया जा सकता है। हर चीज़ को पाने के लिए कड़ी मेहनत करना बेहद जरूरी होता है। बिना मेहनत के सफलता पाना असंभव सा है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने बेहद मुश्किलों के साथ बचपन बिताया लेकिन कभी हार नहीं मानी और आज 3 बड़ी कंपनियों के मालिक बन चुके हैं।

इस शख्स का नाम सुनील कुमार है जो हरियाणा के हिसार के गाँव रावलवास खुर्द के रहने वाले हैं। सुनील ने बचपन से ही मुश्किलों को देखा है। अपनी पढ़ाई भी सुनील ने दीये की रोशनी में पूरी की। वहीं परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी ज्यादा खराब थी कि सुनील को भी बाल मजदूरी करनी पड़ी। लेकिन आज सुनील सफलता की मिसाल को कायम कर चुके हैं। घोर गरीबी का सामना करने के बाद अब सुनील की गिनती करोड़पतियों में की जाती है।

बाल मजदूरी कर चलाया गुजारा



हम जानते हैं कि आज भी ऐसे कई लोग हैं जो बेहद ही मुश्किलों का सामना कर रहे हैं लेकिन इनमें से कुछ हार मानकर बैठ जाते हैं तो वहीं कुछ मुश्किलों का सामना कर आगे बढ़ते हैं। इन्हीं में से एक हैं हरियाणा के हिसार के छोटे से गाँव के रहने वाले सुनील कुमार जो आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। एक समय था जब सुनील को घोर गरीबी का सामना करना पड़ा लेकिन आज उनके पास पैसों की कमी नहीं है और आज वे कई लोगों के लिए उनके रोल मॉडल भी बन चुके हैं।

सुनील का बचपन घोर गरीबी में ही बिता है। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। सुनील के पास बचपन से ही कोई सुविधा नहीं थी लेकिन उन्होंने कभी इसकी शिकायत नहीं की और हमेशा मेहनत पर ही विश्वास किया। सुनील के माता पिता घर को चलाने के लिए ईंटों को ढोने का काम किया करते थे। ऐसे में सुनील ने भी बहुत ही कम उम्र से इस तरह से बाल मजदूरी करना शुरू कर दिया था।

दीये की रोशनी में करते थे पढ़ाई



बेशक सुनील के घर में कई मुश्किलें थी लेकिन सुनील ने कभी अपनी पढ़ाई के बीच में रुकावट नहीं आने दी। सुनील ने शुरुआती पढ़ाई को सरकारी स्कूल से ही पूरा किया। वहीं वे दीये की रोशनी में ही पढ़ाई किया करते थे क्योंकि उनके घर में बिजली का कनेक्शन भी नहीं था। आगे की पढ़ाई करने में भी सुनील को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।

10वीं से आगे की पढ़ाई करने के लिए सुनील को रोजाना बस पकड़कर हिसार जाना होता था। इतना ही नहीं इसके लिए उन्हें 5 किमी पैदल भी चलना पड़ता था। सुनील को पता था किघर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है ऐसे में सुनील हिसार में लोगों को घर घर जाकर ट्यूशन देने का काम भी किया करते थे जिससे परिवार की भी थोड़ी मदद हो जाया करती थी। इसके साथ साथ ही सुनील ने अपनी पढ़ाई को भी पूरी किया था।

कई बढ़िया कंपनियों में कर चुके हैं नौकरी



सुनील ने अपनी पढ़ाई पर कभी कोई आंच नहीं आने दी। सुनील ने स्नातक और मास्टर्स की पढ़ाई के साथ साथ अपने विषय में नेट भी पास किया और पीएचडी की पढ़ाई भी पूरी की। सुनील के मुताबिक उनके गाँव के लोग उनकी मेहनत को देखकर अक्सर कहा करते थे कि वे जरूर आगे जाएंगे। हालांकि सही मार्गदर्शन न होने के कारण सुनील का करियर कुछ समय तक दिशाहीन भी रहा। कई क्षेत्रों में जाने का सोचा लेकिन बात नहीं बनी

इसके बाद सुनील ने आईटीआई के क्षेत्र में कदम रखा। धीरे धीरे उन्हें इस क्षेत्र में सफलता मिलने लगी। नौकरी करने के लिए सुनील यूरोप भी गए। इसके अलावा भी सुनील ने कई बड़ी कंपनियों में नौकरी की थी। इस दौरान सुनील ने पैसे भी जमा किए और अमेरिका में खुद का बिज़नस शुरू करने का मन बनाया। आज उनकी रॉक सेंसर, एस3 बी ग्लोबल और नेक्स्टजेन यूनिकॉन के नाम से 3 कंपनियाँ हैं।

करोड़ों में कर रहे हैं कमाई



आज सुनील अमेरिका में ही सेटल हो चुके हैं। जहां सुनील को कभी गरीबी का सामना करना पड़ा वहीं आज उनके पास पैसों की कोई कमी नहीं है। उनके पास बढ़िया घर होने के साथ साथ कई महंगी गाड़ियां भी हैं। उनकी एक कंपनी अमेरिका, एक न्यूजीलैंड और एक इंडिया में है। जहां कई कर्मचारी भी काम कर रहे हैं। इन कंपनियों से सुनील को करोड़ों की कमाई हो रही है।

आज सुनील की इस सफलता से उनका परिवार भी बेहद खुश है। सुनील के पिता के मुताबिक आज उनके गाँव में लोग उन्हें बेटे के नाम से जानते हैं जो उनके लिए काफी गर्व की बात है। वहीं उनकी बहन भी आज अपने भाई की सफलता से फूले नहीं समा रही है।

Anila Bansal
Anila Bansal
I am the captain of this ship. From a serene sunset in Aravali to a loud noisy road in mega markets, I've seen it all. If someone asks me about Haryana I say "it's more than a city". I have a vision for my city "my Haryana" and I want people to cherish what Haryana got. From a sprouting talent to a voice unheard I believe in giving opportunities and that I believe makes a leader of par excellence.

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