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हरियाणा में 2 रुपए में मिलेंगी यह अनोखी ईंट, अब सस्ते में बनेगा घर, किसानों को भी फायदा

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पराली की समस्या आज भी ज्यों की त्यों बनी हुई है। हर साल किसान फसलों की कटाई के बाद पराली को जला देते हैं। और यह वायु प्रदूषण का कारण बन जाता है। वहीं दूसरी ओर किसानों के पास भी पराली का अब तक कोई ठोस विकल्प नहीं है। फसल कटाई के बाद वे अगले साल की बुआई के लिए इन अवशेषों को जला देते हैं। अगर वे इन्हें नहीं जलाएंगे तो बुआई नहीं हो पाएगी। लेकिन आज हम आपको दो ऐसे युवाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने पराली का सही और ठोस विकल्प ढूंढ चुके हैं।

इनका नाम प्रियब्रत राउतराय और अविक रॉय है। दोनों युवाओं ने मिलकर पराली से ईंटों को तैयार कर एक नया आविष्कार कर दिया है। हर कोई यह देख कर हैरान रह गया। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि जिन फसलों के अवशेषों को किसान जलाते हैं उनसे ईंटे भी बन सकती हैं।

इन ईंटों से दोनों ने IIT हैदराबाद के गार्डरूम को भी तैयार किया है जो बेहद ही खास है। ये गार्डरूम मौसम के अनुसार ही रूम का तापमान रखता है। वहीं अब जल्द ही इस आविष्कार को बड़े स्तर पर शुरू किया जा सकता है। आइए जानते हैं खबर को विस्तार से।

दोनों ने शुरू किया बिजनेस

पराली जलाने के बाद उससे होने वाला प्रदूषण एक बड़ी समस्या बना हुआ है। इसके समस्या के निदान के लिए सरकार और कई लोगों द्वारा कार्य भी किए जा रहे हैं। वहीं दो युवाओं ने भी इस समस्या का हल ढूंढ निकाला है। प्रियब्रत और अविक नाम के दो युवा आज पराली जलाने की समस्या को हल करने और सस्टेनेबल आर्किटेक्चर तैयार करने पर काम कर रहे हैं।

दोनों ही युवा ओडिशा के रहने वाले हैं जिसमें से प्रियब्रत एक पीएचडी स्कॉलर हैं तो वहीं अविक KIITS स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर में एक शिक्षके तौर पर कार्यरत हैं। मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों अलग अलग क्षेत्र में काम कर रहे थे। लेकिन 2011 में दोनों ने अपना डिज़ाइन फर्म शुरू किया जिसका नाम “R Square Dezign” रखा गया। इस दौरान दोनों ने कई डिज़ाइनिंग प्रोजेक्ट पर काम भी किया

ऐसे आया यह आइडिया

दरअसल कुछ सालों में दिल्ली और उसके आस पास से सटे राज्यों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ने लगी थी। तभी इस तरफ दोनों युवाओं का भी ध्यान गया। वहीं दूसरी तरफ दोनों युवाओं को ध्यान कंसट्रक्शन इंडस्ट्री पर भी गया जहां ईंटों की मांग लगातार बढ़ती ही जा रही थी। प्रियब्रत के मुताबिक किसानों के पास पराली को जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था ऐसे में वायु प्रदूषण बढ़ रहा था। वहीं कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री भी पर्यावरण को हानी पहुंचा रही है।

ईंटों की मांग नहीं हो पाती पूरी

उनके मुताबिक देश में लाख से भी ज्यादा ईंटों की भट्ठियाँ हैं लेकिन इसके बावजूद ईंटों की मांग पूरी नहीं हो पाती और साथ ही इसमें मिट्टी की गुणवत्ता को भी नुक्सान होता है। ईंटों के भट्ठों से भी वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। तभी उन्होंने इस अपशिष्ट से ऐसा कुछ बनाने का सोचा जिससे पर्यावरण को हानी न पहुंचे। इसके बाद दोनों ने गन्ना, चावल और गेहूं जैसी फसलों की कटाई के बाद बचने वाले कचरे पर शोध करना शुरू किया।

बायो ब्रिक बनाने का काम हुआ शुरू

इसी बीच प्रियब्रत को IIT हैदराबाद में PHD में दाखिला मिला और अविक भी शिक्षक के तौर पर काम करने लगे। इसी के बाद दोनों ने मिलकर बायो ब्रिक बनाने का काम शुरू किया। 2019 में दोनों ने ICED कोन्फ्रेंस Delft यूनिवर्सिटी में बायो ब्रिक पर अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया। इसके बाद करीब 6 साल की मेहनत के बाद दोनों ने मिलकर पराली से ईंटों को तैयार किया।

पराली की ईंटों से तैयार किया गार्डरूम

बरयो ब्रिक बनाने के बाद उन्होंने इसे Rural Innovators Start Up Conclave 2019 में भी प्रस्तुत किया जिसके लिए उन्हें Special Recognition ट्रॉफी से भी सम्मानित किया गया। इसके बाद दोनों ने इस तकनीक के लिए पेटेंट भी फ़ेल कर दिया था फिर जल्द ही उन्हें 2021 में पेटेंट भी मिल गया। दोनों के मुताबिक पराली से ईंटों को बनाने के लिए वे सीमेंट और चूने का बाइंडर के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

इसके लिए सबसे पहले पराली को छोटे छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। जिसके बाद इसमें पानी, चूना और सीमेंट मिला दिया जाता है। इसके बाद इसे मोल्ड में डालने के बाद दो तीन दिन तक सूखने के लिए रखा जाता है जिसके बाद इससे ईंट तैयार हो जाती है। बता दें कि दोनों युवाओं ने मिलकर IIT हैदराबाद में इन्हीं ईंटों से गार्ड रूम को भी तैयार किया है। ये गार्डरूम 6×6 फीट का है।

ऐसे तैयार हुआ सस्टेनेबल गार्डरूम

इस गार्डरूम को बनाने के लिए मेटल के फ्रेम का इस्तेमाल किया गया है। प्रियब्रत ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि गार्डरूम को तैयार करने के लिए सबसे पहले मेटल के फ्रेम को तैयार किया गया जिसके बाद इसमें मोल्ड लगाकर रॉ मटेरियल से दीवारों को तैयार किया गया। करीब 2 दिन बाद मोल्ड को हटाना शुरू किया गया।

गार्डरूम बनकर है तैयार

मोल्ड हटाने के 10 दिन बाद तक दीवारों को सूखने के लिए छोड़ा गया। ताकि दीवारों को और भी ज्यादा मजबूती मिल पाए। वहीं छत बनाने के लिए PVC शीट का इस्तेमाल किया गया है। जिस पर बायोब्रिक लगाकर दीवार बनाई गई है। वहीं ये छत एक इंसुलेटर के तौर पर भी काम करती है। हाल ही में ये गार्डरूम बनकर तैयार हो गया है। IIT हैदराबाद के बोल्ड यूनिक आइडिया लीड डेवलपमेंट (BUILD) प्रोग्राम के तहत दोनों युवाओं को फंडिंग भी दी गई थी।

किसानों की आय का जरिया बन सकती है पराली

बताया जा रहा है युवाओं द्वारा तैयार किया गया ये गार्डरूम बेहद ही खास है। इस कमरे का तापमान बाहर क मुक़ाबले 6 डिग्री कम ही रहता है। वहीं ईंटों को बनान में चूने और सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है जिससे वे आग प्रतिरोधी भी हैं। आज कंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए भी इस तरह कि ईंटें एक अच्छा विकल्प बन सकती हैं। वहीं किसान भी पराली को अपनी अतिरिक्त आय का साधन बना सकते हैं।करीब 2-3 रूपये हो जाएगी

करीब 2-3 रूपये हो जाएगी ईंट की कीमत

यदि किसानों को पराली के सही प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जाए तो किसान भी पराली को नहीं जलाएंगे जिससे वायु प्रदूषण भी नहीं बढ़ेगा और साथ ही पर्यावरण संरक्षण भी किया जा सकेगा। युवाओं के मुताबिक इस तरह की बायो ब्रिक बनाना बहुत ही आसान है इसलिए इन ईंटों को किसानों द्वारा उनके खेतों में भी तैयार किया जा सकता है जिसे वे सप्लाई कर अच्छी ख़ासी कमाई भी कर सकते हैं।

वहीं इन ईंटों का वजन मिट्टी की ईंटों से पांच गुना और सीमेंट की ईंटों से आठ गुना कम होता है। वहीं यदि बायो ब्रिक को बड़े स्तर पर बनाना शुरू कर दिया जाए तो ईंटों की महंगी कीमत भी कमी आएगी और एक ईंट की कीमत करीब 2-3 रूपये हो जाएगी। इस मटेरियल को गाँव और शहरों में छोटे हाउसिंग मॉडल बनाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

मंत्रालय को भेजेंगे प्रोपोजल

IIT हैदराबाद के डायरेक्टर प्रोफेसर बीएस मूर्ति के मुताबिक कचरे से कमाई का ये सबसे बेहतरीन उदाहरण है। इस प्रोजेक्ट को ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए वे जल्द ही कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को प्रोपोजल भी भेजने वाले हैं। डिज़ाइन विभाग के प्रमुख दीपक जॉन मैथ्यू के अनुसार ये आविष्कार किसानों के जीवन में बदलाव लाने का काम करेगा क्योंकि अब किसान कचरे कि मदद से भी कमाई कर पाएंगे।

 प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति

यह भी किसी से छिपा नहीं है कि हरियाणा और पंजाब के खेतों में पराली जलने की वजह से दिल्ली-एनसीआर सहित आसपास के राज्यों में प्रदूषण की परेशानी कई गुणा बढ़ जाती है। केंद्र सहित तमाम राज्य सरकारें अभी तक भी इस पराली की वजह से होने वाले प्रदूषण से लोगों को छुटकारा नहीं दिलवा पाई हैं। तमाम कोशिशों के बावजूद दिल्ली, हरियाणा और पंजाब प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में इन युवाओं ने एक बड़ा अविष्कार कर सभी सरकारों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है।

पराली से बनने वाली ईंटे ना केवल बेहद सस्ती होंगी, बल्कि इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी और पराली का स्थाई समाधान भी हो जाएगा। इसलिए केंद्र सहित, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब सरकारों को इस ओर ध्यान देना चाहिए। यदि इस ओर गंभीरता पूर्वक कार्य किया गया तो हरियाणा की पराली की वजह से दिल्ली-एनसीआर में होने वाले प्रदूषण से स्थाई निजात मिल जाएगी।

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